वस्त्र मंत्रालय ने बुधवार को दो दिवसीय वस्त्र शिखर सम्मेलन 2026 का समापन किया, जिसमें राज्य सरकारों, उद्योग और शिक्षा जगत के प्रतिनिधियों को एक साथ लाया गया ताकि स्थिरता, निर्यात और वैश्विक बाजार विस्तार पर विशेष जोर देते हुए इस क्षेत्र के लिए भविष्य की रूपरेखा तैयार की जा सके।
समापन सत्र को संबोधित करते हुए केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह ने जिला और राज्य स्तरीय रणनीतियों को सक्रिय दृष्टिकोण के साथ लागू करते हुए योजना से क्रियान्वयन की ओर बढ़ने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने उत्पाद-बाजार सामंजस्य, मूल्यवर्धन, स्थिरता और पर्यावरण मानकों का अनुपालन, मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) का प्रभावी उपयोग और विशिष्ट उत्पादों पर अधिक ध्यान केंद्रित करने के महत्व पर प्रकाश डाला।
वस्त्र सचिव नीलम शमी राव ने कहा कि राज्यों, जिलों, उद्योग हितधारकों और निर्यात संवर्धन परिषदों से प्राप्त सिफारिशों को एक व्यापक राष्ट्रीय वस्त्र निर्यात रोडमैप में शामिल किया जाएगा, जिसका उद्देश्य निर्यात को मजबूत करना और वैश्विक वस्त्र व्यापार में भारत की उपस्थिति को बढ़ाना है।
वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल द्वारा संबोधित एक विशेष सत्र में वस्त्र निर्यात को बढ़ावा देने के लिए हाल ही में संपन्न मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) का लाभ उठाने पर ध्यान केंद्रित किया गया। उन्होंने उद्योग जगत के हितधारकों से जिला स्तर पर सूचना संबंधी कमियों को दूर करने का आग्रह किया और राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों को पुनर्जीवित जिला निर्यात केंद्र पहल में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया।
शिखर सम्मेलन के अंतिम सत्रों में गुणवत्ता मानकों, सतत विकास प्रमाणन, वस्त्र अपशिष्ट प्रबंधन, पुनर्चक्रण प्रणालियों और डिजिटल उत्पाद पासपोर्ट पर विचार-विमर्श किया गया। साथ ही निर्यात को बढ़ावा देने, बाजार विविधीकरण, व्यापार सुगमता, मानव निर्मित रेशों को प्रोत्साहन, वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी लघु एवं मध्यम उद्यमों के विकास और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में ब्रांड इंडिया को मजबूत करने की रणनीतियों की रूपरेखा भी प्रस्तुत की गई। प्रतिभागियों ने 2030 तक 100 अरब अमेरिकी डॉलर के वस्त्र निर्यात का लक्ष्य हासिल करने की इस क्षेत्र की महत्वाकांक्षा को दोहराया।















