बॉलीवुड के दिग्गज निर्देशक कुकू कोहली का 77 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। दिल का दौरा पड़ने के बाद उन्होंने मुंबई के कोकिलाबेन अस्पताल में अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर से हिंदी फिल्म जगत में शोक की लहर है। कुकू कोहली उन निर्देशकों में शुमार रहे, जिन्होंने 1990 के दशक में हिंदी सिनेमा के कई लोकप्रिय सितारों के करियर को नई दिशा दी। खासतौर पर अभिनेता अजय देवगन को फिल्मी दुनिया में पहला बड़ा मौका देने का श्रेय उन्हें दिया जाता है।
अवतार कोहली के नाम से जन्मे कुकू कोहली ने अपने फिल्मी सफर की शुरुआत अभिनेता और निर्देशक राज कपूर के साथ बतौर सहायक निर्देशक की थी। उन्होंने करीब 11 वर्षों तक राज कपूर के साथ काम किया। इस दौरान वह 'बॉबी', 'सत्यम शिवम सुंदरम' और 'प्रेम रोग' जैसी चर्चित फिल्मों की निर्माण प्रक्रिया से जुड़े रहे। राज कपूर की फिल्ममेकिंग को करीब से देखने और समझने के बाद उन्होंने निर्देशन की अपनी राह तैयार की।
इसके बाद कुकू कोहली ने राहुल रवैल के साथ सेकंड यूनिट निर्देशक के तौर पर काम किया। 'बेताब' और 'अर्जुन' जैसी फिल्मों से जुड़े इस दौर ने उन्हें स्वतंत्र निर्देशन के लिए तैयार किया। 1991 में उन्हें वह मौका मिला, जिसने उनके साथ-साथ हिंदी सिनेमा के एक नए अभिनेता का भविष्य भी बदल दिया। फिल्म 'फूल और कांटे' के जरिए उन्होंने अजय देवगन को बतौर अभिनेता लॉन्च किया। फिल्म की सफलता ने अजय देवगन को रातोंरात पहचान दिलाई और कुकू कोहली का नाम भी इंडस्ट्री में स्थापित कर दिया।
कुकू कोहली ने इसके बाद 'सुहाग' जैसी सफल फिल्म का निर्देशन किया, जिसमें पहली बार अजय देवगन और अक्षय कुमार की जोड़ी पर्दे पर नजर आई। करिश्मा कपूर और नगमा अभिनीत यह फिल्म भी दर्शकों के बीच काफी लोकप्रिय हुई। इसके अलावा उन्होंने अजय देवगन और तब्बू के साथ 'हकीकत', गोविंदा के साथ 'अनाड़ी नंबर 1' और अक्षय कुमार-ट्विंकल खन्ना अभिनीत 'जुल्मी' जैसी फिल्मों का निर्देशन किया।
कुकू कोहली की फिल्मों में एक्शन, रोमांस, पारिवारिक भावनाओं और मनोरंजन का खास मेल देखने को मिलता था। 2002 में आई 'ये दिल आशिकाना' उनके करियर की यादगार फिल्मों में शामिल रही। करण नाथ और जीनत अमान अभिनीत इस रोमांटिक फिल्म को खास तौर पर नदीम-श्रवण के संगीत के लिए याद किया जाता है। रिलीज के करीब दो दशक बाद 2026 में यह फिल्म दोबारा सिनेमाघरों में प्रदर्शित हुई, जिसने कुकू कोहली की फिल्मों के प्रति दर्शकों की पुरानी यादें फिर ताजा कर दीं।
निर्देशक के तौर पर कुकू कोहली की आखिरी फिल्म 2004 में आई 'वो तेरा नाम था' थी। इस फिल्म से अर्जन बाजवा और कांची कौल ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत की थी। इसके बाद वह निर्देशन से दूर हो गए लेकिन 1990 और 2000 के शुरुआती दशक में बनाई उनकी फिल्मों ने उन्हें हिंदी सिनेमा के लोकप्रिय निर्देशकों की कतार में बनाए रखा।
कुकू कोहली की निजी जिंदगी भी अक्सर चर्चा में रही। उन्होंने दो शादियां की थीं। उनकी पहली पत्नी रीता कोहली से उनकी दो बेटियां पूजा और करिश्मा हैं। वर्ष 1990 में उन्होंने मशहूर अभिनेत्री अरुणा ईरानी से दूसरी शादी की। दोनों की अपनी कोई संतान नहीं थी। कुकू कोहली और अरुणा ईरानी का रिश्ता लंबे समय तक फिल्म इंडस्ट्री में चर्चा का विषय रहा।
करीब चार दशक लंबे फिल्मी सफर में कुकू कोहली ने बतौर सहायक निर्देशक से लेकर सफल फिल्म निर्देशक तक का सफर तय किया। उन्होंने न सिर्फ कई लोकप्रिय फिल्मों को पर्दे पर उतारा बल्कि अजय देवगन जैसे कलाकार को लॉन्च कर हिंदी सिनेमा को एक बड़ा सितारा भी दिया। उनके निधन के साथ बॉलीवुड के एक ऐसे दौर और फिल्मकार की विदाई हुई है, जिसकी फिल्मों और उनसे जुड़े कलाकारों की यादें लंबे समय तक दर्शकों के बीच बनी रहेंगी।















