सेमीकंडक्टर और एआई पर भारत-जापान सहयोग बढ़ाने पर जोर, पीयूष गोयल ने की उद्योग जगत से चर्चा


विज्ञान 26 August 2026
post

सेमीकंडक्टर और एआई पर भारत-जापान सहयोग बढ़ाने पर जोर, पीयूष गोयल ने की उद्योग जगत से चर्चा

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने मंगलवार को टोक्यो में सेमीकंडक्टर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) पर आयोजित भारत-जापान उद्योग गोलमेज बैठक की अध्यक्षता की। उन्होंने भारत और जापान के बीच आर्थिक एवं तकनीकी सहयोग को मजबूत करने में इन उभरते क्षेत्रों के बढ़ते महत्व पर जोर दिया। गोयल ने जापान के अर्थव्यवस्था, व्यापार एवं उद्योग मंत्री अकाजावा रयोसेई के साथ द्विपक्षीय बैठक भी की, जिसमें दोनों मंत्री व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (सीईपीए) की समीक्षा में तेजी लाने पर सहमत हुए।

आर्थिक सुरक्षा साझेदारी के अहम स्तंभ

गोयल ने कहा कि सेमीकंडक्टर और एआई भारत-जापान सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों के रूप में उभर रहे हैं। ये प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान के प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची द्वारा वार्षिक शिखर सम्मेलन के दौरान परिकल्पित आर्थिक सुरक्षा साझेदारी के अहम स्तंभ हैं। उन्होंने उद्योग जगत के प्रतिनिधियों को भरोसा दिलाया कि इन रणनीतिक क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहयोग को गहरा और व्यापक बनाने में भारत सरकार का पूरा समर्थन मिलेगा।

2032 तक 150 अरब डॉलर की हो सकती है सेमीकंडक्टर मांग

केंद्रीय मंत्री ने भारत के सेमीकंडक्टर क्षेत्र में तेजी से बढ़ते अवसरों को रेखांकित किया। अनुमान के मुताबिक, 2032 तक देश में सेमीकंडक्टर की मांग 150 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच सकती है। उन्होंने सरकार की व्यापक सेमीकंडक्टर रणनीति की जानकारी देते हुए कहा कि इसमें चिप डिजाइन, सेमीकंडक्टर मशीनरी एवं सामग्री, फैब्रिकेशन, एटीएमपी/ओएसएटी, अनुसंधान एवं विकास और प्रतिभा विकास शामिल हैं।

सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम के लिए बड़े निवेश की प्रतिबद्धता

गोयल ने बड़े पैमाने पर निवेश को बढ़ावा देने और देश में व्यापक सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम तैयार करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धताओं का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि ‘सेमीकॉन इंडिया 1.0’ के तहत 10 अरब अमेरिकी डॉलर और ‘सेमीकॉन इंडिया 2.0’ के तहत अतिरिक्त 15 अरब अमेरिकी डॉलर की सरकारी प्रतिबद्धता की गई है।

भारतीय प्रतिभा और जापानी तकनीक का तालमेल

गोयल ने भारत के कुशल और प्रतिभाशाली पेशेवरों के बड़े समूह को जापान की उन्नत तकनीक, इंजीनियरिंग क्षमताओं और औद्योगिक विशेषज्ञता के साथ जोड़ने की संभावनाओं पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इस तालमेल से दोनों देशों के बीच निवेश, नवाचार, मैन्यूफैक्चरिंग और प्रौद्योगिकी साझेदारी के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।

21 प्रमुख जापानी कंपनियों ने लिया हिस्सा

गोलमेज बैठक में जापान की करीब 21 प्रमुख कंपनियों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। इनमें टोक्यो इलेक्ट्रॉन, डाइफुकु, प्रेफर्ड नेटवर्क्स, अबेजा, मिनेबेआमित्सुमी, तनाका प्रेशियस मेटल्स टेक्नोलॉजीज, फुजीफिल्म होल्डिंग्स, टोरे इंडस्ट्रीज, निप्पॉन एक्सप्रेस होल्डिंग्स, मिजुहो फाइनेंशियल ग्रुप, क्योसेरा कॉरपोरेशन, फुजी इलेक्ट्रिक, टीओके, एयर वॉटर, रोहम, टोमोएगावा कॉरपोरेशन, एमयूएफजी बैंक, एनईसी कॉरपोरेशन, यामाया इलेक्ट्रॉनिक्स, एएनए ट्रेडिंग और जेट्रो शामिल थे। बैठक में भारत के विभिन्न व्यापार मंडलों और व्यापार प्रतिनिधिमंडलों ने भी हिस्सा लिया।

‘मेक इन इंडिया’ के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई

जापानी कंपनियों ने भारत के सेमीकंडक्टर और एआई क्षेत्रों में बढ़ते अवसरों के प्रति विश्वास जताया। कंपनियों ने ‘मेक इन इंडिया’, ‘डिजाइन इन इंडिया’ और ‘डेवलप इन इंडिया’ के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने अपने कामकाज, क्षमताओं और संबंधित क्षेत्रों में परियोजनाओं के कार्यान्वयन की जानकारी भी केंद्रीय मंत्री को दी।

उद्योग की चिंताओं पर सक्रियता से काम करेगा भारत

जापानी उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के सुझावों और चिंताओं का जवाब देते हुए गोयल ने भरोसा दिलाया कि भारत सरकार उठाए गए मुद्दों पर सक्रियता से काम करेगी। उन्होंने कहा कि भारत इन रणनीतिक क्षेत्रों में भारत-जापान साझेदारी की बड़ी संभावनाओं से पूरी तरह अवगत है। उन्होंने तेजी से सार्थक नतीजे हासिल करने के लिए टोक्यो स्थित भारतीय दूतावास और नई दिल्ली में संबंधित मंत्रालयों एवं विभागों के जरिए उद्योग जगत के साथ सक्रिय संपर्क बनाए रखने की बात कही।

सीईपीए की समीक्षा में तेजी पर सहमति

इससे पहले 25 अगस्त को टोक्यो में गोयल ने जापान के अर्थव्यवस्था, व्यापार एवं उद्योग मंत्री अकाजावा रयोसेई के साथ द्विपक्षीय बैठक की। दोनों मंत्रियों ने द्विपक्षीय व्यापार और निवेश सहित आर्थिक सहयोग की समीक्षा की। उन्होंने व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (सीईपीए) की समीक्षा में तेजी लाने की आवश्यकता पर चर्चा की, ताकि इसे भविष्य की जरूरतों के अनुरूप और उभरते आर्थिक अवसरों के प्रति अधिक अनुकूल बनाया जा सके।

10 ट्रिलियन येन निवेश लक्ष्य पर भी चर्चा

दोनों मंत्रियों ने नए और उभरते क्षेत्रों, अगली पीढ़ी के उद्योगों, मैन्यूफैक्चरिंग, तकनीक और नवाचार में सहयोग पर भी चर्चा की। उन्होंने जापान से भारत में 10 ट्रिलियन येन के निजी निवेश के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में हुई प्रगति की समीक्षा की। दोनों पक्षों ने इस सहयोग को भारत-जापान विशेष रणनीतिक एवं वैश्विक साझेदारी को और मजबूत करने वाला बताया। 

You might also like!