केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को 'ऐतिहासिक' और दूरदर्शी बताया


देश 04 February 2026
post

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को 'ऐतिहासिक' और दूरदर्शी बताया

केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने आज कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता एक ऐतिहासिक और दूरदर्शी व्यापार समझौता है जो भारत के राष्ट्रीय हित को केंद्र में रखता है
 
 
आज शाम नई दिल्ली में मीडिया को संबोधित करते हुए मंत्री ने कहा कि यह समझौता वैश्विक अर्थव्यवस्था में देश की स्थिति को मजबूत करता है। उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हमेशा देश के कृषि और दुग्ध उत्पादन क्षेत्रों के हितों का ध्यान रखा है और इन क्षेत्रों के लोगों के उज्ज्वल भविष्य को सुनिश्चित करने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। मंत्री ने इस बात पर खुशी व्यक्त की कि देश यह समझता है कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में भारत के संवेदनशील क्षेत्रों के हितों की रक्षा की गई है।
 
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इस समझौते से लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई), कपड़ा, रत्न एवं आभूषण, चमड़े के उत्पाद और समुद्री उत्पाद सहित कई क्षेत्रों को लाभ होगा। उन्होंने आगे कहा कि इस समझौते से भारत को विश्व स्तरीय प्रौद्योगिकी प्राप्त करने के अवसर मिलेंगे, जिससे भारत की विकास गाथा और अर्थव्यवस्था को और गति मिलेगी। श्री गोयल ने यह भी बताया कि व्यापार समझौते के अंतिम विवरण पर काम चल रहा है और जल्द ही भारत-अमेरिका का एक संयुक्त बयान जारी किया जाएगा।
 
 
मंत्री ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं की भी इस सौदे के संबंध में लोगों को गुमराह करने और भ्रम पैदा करने के लिए आलोचना की।
 
उद्योग जगत के संगठनों ने भी भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का स्वागत किया। आकाशवाणी न्यूज़ से विशेष बातचीत में एसोचैम के अध्यक्ष निर्मल के. मिंडा ने इसे एक बड़ी उपलब्धि बताया, क्योंकि अमेरिका ने भारतीय निर्यात पर टैरिफ दर घटाकर 18 प्रतिशत कर दी है। उन्होंने कहा कि इस समझौते से 'मेड इन इंडिया' उत्पादों को बढ़ावा मिलेगा और दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था तक पहुंच बढ़ेगी।
 
भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) ने भी भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की सराहना करते हुए इसे दोनों देशों के बीच रणनीतिक आर्थिक साझेदारी की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। सीआईआई के अध्यक्ष श्री राजीव मेमानी ने कहा कि अपेक्षित 18 प्रतिशत की कमी से भारतीय उत्पादों की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी, साथ ही विनिर्माण क्षेत्र में वृद्धि, रोजगार सृजन और सुदृढ़ आपूर्ति श्रृंखलाओं के विकास को गति मिलेगी।

You might also like!