जिले के ग्राम पंचायत हितामेटा के आश्रित गांव झिटकीपारा में प्राथमिक शाला के बच्चे पिछले करीब एक साल से झोपड़ीनुमा अस्थायी कक्ष में पढ़ाई करने को मजबूर हैं। 26 अगस्त 2025 को आई भीषण प्राकृतिक आपदा ने स्कूल भवन को इस कदर क्षतिग्रस्त कर दिया कि वह बच्चों के बैठने लायक नहीं बचा। विडंबना यह है कि आपदा को एक वर्ष पूरा होने वाला है, लेकिन आज तक नया भवन नहीं बन पाया है।
बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए शिक्षा विभाग ने विद्यालय भवन में पढ़ाई बंद कराकर अस्थायी व्यवस्था की गई, स्कूल परिसर के बाहर बांस, फेंसिंग और टीन की छत से एक झोपड़ीनुमा कक्ष तैयार किया गया, जहां पहली से पांचवीं तक के सभी छात्र-छात्राओं को एक साथ बैठाकर पढ़ाया जा रहा है। सीमित जगह, बरसात के दौरान टपकती छत, गर्मी में उमस और अन्य असुविधाओं के बीच नन्हे बच्चे शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। अस्थायी व्यवस्था लंबे समय तक समाधान नहीं हो सकती। छोटे-छोटे बच्चे एक ही कमरे में बैठकर पढ़ाई करते हैं, जिससे पढ़ाई भी प्रभावित होती है बरसात के दिनों में स्थिति और भी खराब हो जाती है।
दंतेवाड़ा के जिला शिक्षा अधिकारी प्रमोद ठाकुर का कहना है कि, आपदा के बाद से विभाग लगातार नए भवन निर्माण के लिए राशि की मांग कर रहा था। बजट उपलब्ध नहीं होने के कारण निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका।अब डीएमएफ (जिला खनिज न्यास) मद से राशि स्वीकृत हो चुकी है। आवश्यक प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद जल्द ही नए विद्यालय भवन का निर्माण शुरू कराया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि, 26 अगस्त 2025 को दक्षिण बस्तर सहित पूरे बस्तर संभाग में आई बाढ़ और प्राकृतिक आपदा ने भारी तबाही मचाई थी। दंतेवाड़ा जिले में भी कई गांवों की सड़कें, पुल-पुलिया, शासकीय भवन और स्कूल क्षतिग्रस्त हो गए थे, झिटकीपारा का प्राथमिक विद्यालय भी इस आपदा की चपेट में आ गया। बाढ़ का पानी स्कूल भवन में भर गया, जिससे दीवारों में गहरी दरारें पड़ गईं और छत पूरी तरह कमजोर हो गई। आज भी बारिश के दौरान छत से पानी टपकता है और भवन कभी भी गिर सकता है।
गौरतलब है कि, बाढ़ के बाद स्वयं मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने दंतेवाड़ा पहुंचकर प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया था। उन्होंने आपदा से हुए नुकसान का जायजा लेने के बाद दंतेवाड़ा जिले के लिए 53 करोड़ रुपये की सहायता राशि स्वीकृत की थी, ताकि क्षतिग्रस्त सड़कें, पुल-पुलिया, शासकीय भवन और अन्य सार्वजनिक परिसंपत्तियों की मरम्मत एवं पुनर्निर्माण कराया जा सके। इसके बावजूद झिटकीपारा जैसे कई बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में हालात अब भी सामान्य नहीं हो पाए हैं।
एक साल बाद भी झिटकीपारा में प्राथमिक शाला भवन नहीं बना, अस्थायी झोपड़ी में स्कूल
















