काठमांडू, 28 मई । नेपाल के राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने स्पष्ट किया है कि जेन जी विद्रोह से संबंधित आयोग की सिफारिशों को लागू करना सरकार की संवैधानिक जिम्मेदारी है। आयोग ने कहा है कि कानूनी प्रावधानों के अनुसार सरकार को तीन महीने के भीतर इन सिफारिशों पर कार्रवाई करना अनिवार्य है।
आयोग के सहायक प्रवक्ता श्याम बाबू काफ्ले ने बताया कि आंदोलन के दौरान राज्य तंत्र की ओर से गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन होने के तथ्य आयोग की जांच में सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि नेपाल में मानवाधिकार उल्लंघन के मामलों में कार्रवाई के लिए पर्याप्त कानून नहीं हैं, इसलिए आयोग ने आवश्यक कानून बनाने तथा दोषियों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करने की सिफारिश की है।
आयोग द्वारा सरकार को सौंपी गई रिपोर्ट और उसकी सिफारिशों के कार्यान्वयन को लेकर देशभर में चर्चा जारी है। इस संबंध में काफ्ले ने कहा कि यदि सरकार निर्धारित समय में सिफारिशों को लागू नहीं कर पाती है, तो उसे दो महीने के भीतर कारण सहित आयोग को जानकारी देनी होगी।
उन्होंने कहा कि यदि सरकार कार्यान्वयन में आने वाली समस्याओं की जानकारी आयोग को देती है, तो आयोग उस पर पुनर्विचार कर सकता है। नए तथ्य सामने आने पर उसी आधार पर निर्णय लिया जा सकता है। लेकिन यदि सरकार कोई प्रतिक्रिया नहीं भेजती है, तो आयोग यह मानेगा कि सिफारिशों को लागू करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
काफ्ले ने बताया कि आयोग ने विभिन्न प्रकार की सिफारिशें की हैं, जिनमें कानून बनाकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करना, कुछ व्यक्तियों पर मुकदमा चलाने की सिफारिश करना, निर्देश जारी करना, चेतावनी देना तथा आयोग के अधिकार क्षेत्र से बाहर के मामलों में सूक्ष्म जांच कर कार्रवाई सुनिश्चित करना शामिल है।
उल्लेखनीय है कि, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने बुधवार को जेन जी विद्रोह से संबंधित अपनी रिपोर्ट कार्रवाई संबंधी सिफारिशों के साथ सरकार को सौंप दी थी।
जेन जी विद्रोह पर मानवाधिकार आयोग की सिफारिशें लागू करना सरकार की जिम्मेदारी : आयोग


















