नई दिल्ली, 22 सितंबर । केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को भारतीय उद्योग जगत से केवल कारोबार का विस्तार करने के बजाय मजबूत, टिकाऊ और बेहतर संचालन वाली कंपनियों के निर्माण पर ध्यान देने को कहा। उन्होंने कहा कि 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए उद्योग को इस दिशा में आगे बढ़ना होगा।
नई दिल्ली में ऑल इंडिया मैनेजमेंट एसोसिएशन (एआईएमए) के 53वें नेशनल मैनेजमेंट कन्वेंशन को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में सकल स्थिर पूंजी निर्माण हमारी जीडीपी के 34 फीसदी से अधिक हो गया है। अब भारतीय उद्योग को ऐसे संस्थान और कंपनियां बनानी चाहिए, जिनमें बड़े पैमाने के साथ ही टिकाऊपन, बेहतर गुणवत्ता, अच्छा संचालन और मजबूत प्रौद्योगिकी क्षमता हो।
सीतारमण ने कहा कि सरकार ने निजी निवेश को बढ़ावा देने के लिए सोच-समझकर सार्वजनिक पूंजीगत खर्च को बढ़ाया है। इसका असर पूंजी निर्माण में वृद्धि, विनिर्माण क्षेत्र में उत्पादन क्षमता के बेहतर उपयोग तथा उद्योगों को बैंक कर्ज में बढ़ोत्तरी के रूप में दिखाई दे रहा है। उन्होंने भारतीय उद्योग जगत से आग्रह किया कि वे केवल बड़े पैमाने के बजाय गुणवत्ता, अनुसंधान और विकास तथा गवर्नेंस को प्राथमिकता दें।
उन्होंने कहा कि उद्योग जगत को मिलने वाले बैंक कर्ज में भी तेजी आई है और जून में इसमें सालाना आधार पर 19 फीसदी की वृद्धि हुई है। केंद्रीय वित्त मंत्री ने कहा कि जरूरतमंद क्षेत्रों तक कर्ज पहुंच रहा है। सरकार के मुक्त व्यापार समझौते भारत के श्रम-प्रधान वस्तुओं और सेवाओं के लिए नए बाजार के अवसर खोल रहे हैं। उन्होंने कारोबारी क्षेत्र से इस अवसर का लाभ उठाने का आग्रह किया है।
सीतारमण ने कहा कि वैश्विक आर्थिक वृद्धि की रफ्तार तीन फीसदी से नीचे रहने के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था लगभग आठ फीसदी की दर से बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि दो सितंबर को जापान क्रेडिट रेटिंग एजेंसी ने स्थिर परिदृश्य के साथ भारत की दीर्घकालिक विदेशी मुद्रा और स्थानीय मुद्रा जारीकर्ता रेटिंग को ‘बीबीबी प्लस’ से बढ़ाकर ‘ए माइनस’ कर दिया है। उन्होंने कहा कि 35 साल से अधिक समय में यह पहली बार है, जब भारत को ‘ए’ श्रेणी की रेटिंग मिली है।
सीतारमण ने भारतीय उद्योग जगत से कंपनियों के निर्माण पर ध्यान देने को कहा
















