नई दिल्ली, 23 अक्टूबर । मतदाता सूचियों को अपडेट करने की प्रक्रिया विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के खिलाफ शुक्रवार को दिल्ली में वाम दलों और कुछ छात्र संगठनों ने मार्च निकाला। प्रदर्शनकारियों ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और एसआईआर प्रक्रिया को रोकने की मांग की। इस दौरान दिल्ली पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया।
एसआईआर के खिलाफ मार्च गोल डाकखाना के पास कालीबाड़ी मार्ग और भाई वीर सिंह मार्ग के चौराहे से शुरू हुआ और निर्वाचन आयोग के मुख्यालय की ओर बढ़ा। प्रदर्शनकारियों ने कथित तौर पर मतदाताओं के नाम हटाए जाने के विरोध में नारे लगाए। इनमें ‘ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दो’, ‘एसआईआर रोको’ और ‘वोट चोरी बर्दाश्त नहीं करेंगे’ जैसे नारे शामिल थे।
प्रदर्शन में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) की वरिष्ठ नेता वृंदा करात ने कहा कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक उनका संघर्ष जारी रहेगा। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के नेता पी. संदोश ने कहा कि आंदोलन तेज होगा और ज्ञानेश कुमार को कोई नहीं बचा सकता।
इस बीच, गृह मंत्रालय ने दिल्ली में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की 273 कंपनियों की तैनाती 31 अक्टूबर तक बढ़ा दी है। सूत्रों के अनुसार राजनीतिक और अन्य समूहों की ओर से अचानक विरोध प्रदर्शन किए जाने की आशंका के मद्देनजर यह फैसला लिया गया है।
इसी बीच कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेता सौरव दास और आशुतोष रांका शुक्रवार को दिल्ली के मंदिर मार्ग थाने में विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश हुए। इस दौरान आंदोलन से जुड़े नेताओं ने कहा कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर आंदोलन जारी रहेगा।
पेशी के बाद सौरव दास ने मीडिया से कहा कि अदालत की कार्यवाही का सभी को सम्मान करना चाहिए। उन्होंने कहा कि आंदोलन की आगे की रणनीति सामूहिक रूप से तय की जाएगी। यह फैसला अकेले सीजेपी नहीं करेगी। इस आंदोलन से कई लोग जुड़े हैं और सभी मिलकर आगे की दिशा पर चर्चा करेंगे। उन्होंने कहा कि ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा अपरिहार्य है।
सीजेपी नेता आशुतोष रांका से जब पूछा गया कि नेताओं को हिरासत में लिए जाने की स्थिति में आंदोलन कैसे जारी रहेगा, तो उन्होंने कहा कि आंदोलन जारी रहेगा। वे खुद को नेता नहीं, बल्कि देश के लोगों की ओर से मिले मंच का संरक्षक मानते हैं। उनका प्रयास इस मंच के माध्यम से अपनी भूमिका निभाना है।
रांका ने कहा कि आंदोलन जेल के अंदर या बाहर, दोनों ही परिस्थितियों में जारी रहेगा। इस आंदोलन से उन्हें अपने बारे में और शासन की कार्यप्रणाली के बारे में काफी कुछ सीखने को मिला है। उन्होंने कहा कि जरूरत के अनुसार आंदोलन में बदलाव किए जाएंगे और इसे आगे विकसित किया जाएगा।
एसआईआर के खिलाफ मार्च, दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया

















