प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘विकसित वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम 2026’ के प्रतिभागियों से संवाद करते हुए कहा कि विकसित गांव ही विकसित भारत की मजबूत नींव हैं और सीमावर्ती गांवों को अब देश के ‘पहले गांव’ के रूप में विकसित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम युवाओं में राष्ट्र निर्माण की भावना को मजबूत कर रहा है और उन्हें देश की जमीनी वास्तविकताओं से जोड़ रहा है।
प्रधानमंत्री ने बताया कि ‘मेरा युवा भारत (MY Bharat)’ प्लेटफॉर्म के माध्यम से देशभर के करोड़ों युवा राष्ट्र निर्माण की विभिन्न पहलों से जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग के बाद युवाओं को सीमावर्ती गांवों में भेजने की पहल की गई, ताकि वे वहां की संस्कृति, चुनौतियों और देशभक्ति की भावना को करीब से समझ सकें। इस कार्यक्रम के तहत तीन लाख आवेदनों में से 400 युवाओं का चयन किया गया।
उन्होंने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों के लोगों का देशप्रेम कठिन परिस्थितियों के बावजूद कभी कमजोर नहीं पड़ा। पहले इन गांवों को देश का अंतिम गांव माना जाता था, लेकिन अब सरकार ने इन्हें देश का पहला गांव मानते हुए यहां सड़क, बिजली, पेयजल, गैस, इंटरनेट और अन्य बुनियादी सुविधाओं का तेजी से विस्तार किया है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि आधारभूत ढांचे के विकास से सीमावर्ती क्षेत्रों में पर्यटन को भी बढ़ावा मिला है, जिससे स्थानीय लोगों की आय और रोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं। उन्होंने कहा कि वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम इन क्षेत्रों के समग्र विकास को नई गति दे रहा है।
युवाओं से संवाद के दौरान प्रधानमंत्री ने उन्हें अपने अनुभव कम से कम 100 अन्य युवाओं के साथ साझा करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि युवा स्थानीय कंटेंट क्रिएटर्स के साथ मिलकर सीमावर्ती क्षेत्रों की संस्कृति और उत्पादों को बढ़ावा दें तथा परिवार और शैक्षणिक संस्थानों के माध्यम से इन क्षेत्रों की यात्रा को प्रोत्साहित करें।
प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि जब देश का युवा जमीनी चुनौतियों और उनके समाधान से सीधे जुड़ेगा, तब विकसित भारत का लक्ष्य और अधिक तेजी से साकार होगा। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी के भारत का भविष्य युवाओं के हाथों में है और उनकी सक्रिय भागीदारी से देश नई ऊंचाइयों तक पहुंचेगा।
















