मानसून में हरियाली का मंत्र

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मानसून में हरियाली का मंत्र

मानसून के मौसम में पौधों की देखभाल थोड़ा अलग तरीके से करनी पड़ती है। अधिक बारिश और नमी के कारण पौधों में फंगल रोग, जड़ों का सड़ना और कीटों की समस्या बढ़ सकती है। पौधों को स्वस्थ रखने के लिए ये उपाय अपनाएं:

1. पानी जमा न होने दें

गमलों या क्यारियों में जल निकासी (Drainage) अच्छी होनी चाहिए। जड़ों के आसपास पानी जमा रहने से पौधा सड़ सकता है।

2. जरूरत के अनुसार ही सिंचाई करें

बारिश के दिनों में मिट्टी पहले से नम रहती है, इसलिए अतिरिक्त पानी देने से बचें। मिट्टी को छूकर देखें, सूखी लगे तभी पानी दें।

3. फंगल रोगों से बचाव करें

पत्तियों पर सफेद, काले या भूरे धब्बे दिखाई दें तो प्रभावित पत्तियों को हटा दें। पौधों के बीच पर्याप्त दूरी रखें ताकि हवा का संचार बना रहे।

4. खरपतवार हटाते रहें

बारिश में घास-फूस तेजी से बढ़ती है। इन्हें समय-समय पर हटाने से पौधों को पर्याप्त पोषण मिलता है।

5. जैविक खाद का प्रयोग करें

वर्मी कम्पोस्ट, गोबर खाद या कम्पोस्ट का सीमित मात्रा में उपयोग करें। इससे पौधों को आवश्यक पोषक तत्व मिलते हैं।

6. कीटों पर नजर रखें

बरसात में घोंघे, स्लग, एफिड और अन्य कीट बढ़ सकते हैं। नीम के तेल का छिड़काव एक अच्छा प्राकृतिक उपाय है।

7. टूटे और सड़े हिस्से हटाएं

पीली, सूखी या रोगग्रस्त पत्तियों की नियमित छंटाई करें। इससे पौधा नई वृद्धि पर ऊर्जा खर्च कर पाता है।

8. सहारा दें

लंबे या कमजोर पौधों को लकड़ी या बांस की सहायता से बांध दें ताकि तेज हवा और बारिश में वे गिरें नहीं।

9. पर्याप्त धूप मिलने दें

जहां संभव हो, पौधों को ऐसी जगह रखें जहां बारिश के बीच कुछ घंटे धूप भी मिल सके। धूप फंगल संक्रमण की संभावना कम करती है।

10. गमलों की नियमित जांच करें

गमलों के नीचे के छेद बंद न हों, यह सुनिश्चित करें। यदि पानी निकल नहीं रहा है तो तुरंत सफाई करें।

मानसून में तुलसी, मोगरा, गुड़हल, मिर्च, धनिया, पालक और कई सजावटी पौधे अच्छी तरह बढ़ते हैं, बशर्ते जल निकासी और रोग नियंत्रण का ध्यान रखा जाए। 

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