आयकर विभाग ने 2026-27 के लिए लागत मुद्रास्फीति सूचकांक बढ़ाकर 384 किया


व्यापार 16 July 2026
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आयकर विभाग ने 2026-27 के लिए लागत मुद्रास्फीति सूचकांक बढ़ाकर 384 किया

नई दिल्ली, 16 जुलाई । आयकर विभाग ने अचल संपत्ति, प्रतिभूतियों और आभूषणों की बिक्री पर होने वाले दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ की गणना के लिए चालू वित्त वर्ष 2026-27 का लागत मुद्रास्फीति सूचकांक (सीआईआई) बढ़ा दिया है।

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) की अधिसूचना के अनुसार वित्त वर्ष 2026-27 के लिए लागत मुद्रास्फीति सूचकांक 384 निर्धारित किया गया है। पिछले वित्त वर्ष 2025-26 के लिए ये सूचकांक 376 था। विभाग के मुताबिक लागत मुद्रास्फीति सूचकांक (सीआईआई) की अधिसूचना आयकर अधिनियम, 1961 के तहत प्रत्येक वित्त वर्ष के लिए जारी की जाती है। इसका उपयोग किसी पूंजीगत परिसंपत्ति की बिक्री पर पूंजीगत लाभ की गणना करते समय ‘सूचकांकित अधिग्रहण लागत’ (इंडेक्स्ड कॉस्ट ऑफ एक्विजिशन) निर्धारित करने के लिए किया जाता है।

आमतौर पर किसी परिसंपत्ति को ‘दीर्घकालिक पूंजीगत परिसंपत्ति’ की श्रेणी में आने के लिए 36 महीने से अधिक समय तक रखा जाना जरूरी होता है। हालांकि, अचल संपत्ति एवं गैर-सूचीबद्ध शेयर के लिए ये अवधि 24 महीने तथा सूचीबद्ध प्रतिभूतियों के लिए 12 महीने है।

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