सुप्रीम कोर्ट ने आज नीट परीक्षा के संचालन में
बार-बार हुई चूक पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यह दुखद है कि राष्ट्रीय परीक्षण
एजेंसी ने पहले के पेपर लीक विवाद से कोई सबक नहीं सीखा है।
न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और आलोक आराधे की
पीठ ने केंद्र सरकार, राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) और
सीबीआई से उन याचिकाओं पर जवाब मांगा है जिनमें चिकित्सा प्रवेश परीक्षा आयोजित
करने के लिए परीक्षण एजेंसी को एक अधिक मजबूत और स्वायत्त निकाय से बदलने की मांग
की गई है।
अदालत ने एनटीए को गुरुवार तक हलफनामा दाखिल
करने का निर्देश दिया है,
जिसमें पूर्व आईएसआरओ प्रमुख के.
राधाकृष्णन की अध्यक्षता वाली समिति द्वारा पिछले वर्ष एजेंसी के कामकाज में सुधार
के लिए की गई सिफारिशों के अनुपालन का विस्तृत विवरण दिया जाए। याचिकाओं में आरोप
लगाया गया है कि बार-बार होने वाले प्रश्नपत्र लीक से 22 लाख से अधिक छात्रों के अधिकारों पर असर पड़ा
है। याचिका में भविष्य की परीक्षाओं की निगरानी के लिए सुप्रीम कोर्ट के एक
सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय निगरानी समिति के गठन की भी
मांग की गई है।
पेपर लीक होने के आरोपों के बाद इस महीने की 3 तारीख को आयोजित होने वाली NEET-UG परीक्षा रद्द कर दी गई।
















