शहरी विकास विभाग के सचिव सतेंद्र सिंह ने कहा है कि किफायती आवास व्यवस्था को योजना-आधारित दृष्टिकोण से विकसित करके एक सतत व्यवस्था में बदलना होगा, जो स्वामित्व और किराये सहित आवास के विकल्प प्रदान करे। नई दिल्ली में आज आयोजित किफायती आवास की पुनर्कल्पना: योजना से सतत व्यवस्था तक विषय पर राष्ट्रीय सम्मेलन में उन्होंने कहा कि भारत में तेजी से होते शहरीकरण से किफायती आवास, आर्थिक विकास और सामाजिक विकास का एक प्रमुख स्तंभ बन गया है। श्री सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी के अंतर्गत 1 करोड 25 लाख से अधिक घरों को मंजूरी दी गई है। इनमें से एक करोड़ से अधिक घर पहले ही बनकर लाभार्थियों को सौंपे जा चुके हैं।
इस अवसर पर नीति आयोग के सदस्य राजीव गौबा ने कहा कि आवास को एक अलग कल्याणकारी उपाय के बजाय शहरी नियोजन और आर्थिक विकास के अभिन्न अंग के रूप में देखा जाना चाहिए। श्री गौबा ने कहा कि भारत में तेजी से हो रही जनसंख्या वृद्धि और शहरीकरण से किफायती आवास की अतिरिक्त मांग पैदा होगी। उन्होंने आवास क्षेत्र में भूमि की उपलब्धता को एक प्रमुख बाधा बताया और शहरी योजनाओं में सुधार, किफायती आवास के लिए अधिक भूमि की उपलब्धता और विकास अधिकारों की मांग की।

















