SBI रिपोर्ट में खुलासा: हर 4 में 1 कैजुअल वर्कर को मिल रहा कम वेतन


व्यापार 09 May 2026
post

SBI रिपोर्ट में खुलासा: हर 4 में 1 कैजुअल वर्कर को मिल रहा कम वेतन

दिल्ली: SBI रिसर्च की शुक्रवार को जारी रिपोर्ट में भारत के श्रम बाजार को लेकर गंभीर तस्वीर सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार देश में हर चार में से एक कैजुअल वर्कर को सरकार द्वारा तय न्यूनतम मजदूरी से कम भुगतान किया जा रहा है। यह स्थिति वेज एनफोर्समेंट और लेबर प्रोटेक्शन सिस्टम में बड़े अंतर को दर्शाती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि मिनिमम वेज नियमों के पालन में राज्यों के बीच भारी असमानता देखने को मिल रही है। कई राज्यों में स्थिति काफी खराब है, जहां बड़ी संख्या में श्रमिकों को निर्धारित वेतन भी नहीं मिल पा रहा है।

आंकड़ों के अनुसार छत्तीसगढ़ में 70 प्रतिशत से अधिक कैजुअल वर्कर को तय मिनिमम वेज से कम भुगतान मिलता है, जो देश में सबसे अधिक है। इसके बाद ओडिशा में 66 प्रतिशत और झारखंड में 65 प्रतिशत वर्कर ऐसे हैं जिन्हें न्यूनतम वेतन से कम मजदूरी मिल रही है। इन राज्यों को मिनिमम वेज एनफोर्समेंट के मामले में सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वाले राज्यों में शामिल किया गया है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल जैसे अपेक्षाकृत विकसित राज्यों में भी स्थिति पूरी तरह संतोषजनक नहीं है। यहां लगभग एक-तिहाई कैजुअल वर्कर को तय न्यूनतम मजदूरी नहीं मिल पा रही है। वहीं कर्नाटक में हर पांच में से कम से कम एक कैजुअल वर्कर को न्यूनतम वेतन से कम भुगतान किया जा रहा है।

SBI
रिसर्च के अनुसार यह स्थिति केवल श्रमिकों की आय पर असर डालती है, बल्कि उनके जीवन स्तर और सामाजिक सुरक्षा पर भी गंभीर प्रभाव डालती है। रिपोर्ट में संकेत दिया गया है कि श्रम कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन में अभी भी बड़े सुधार की जरूरत है।

इसी बीच देश के विभिन्न हिस्सों में मजदूरों के विरोध प्रदर्शन भी देखने को मिले हैं। हाल ही में उत्तर प्रदेश के नोएडा, बिहार के बरौनी, हरियाणा के पानीपत, फरीदाबाद और मानेसर तथा गुजरात के सूरत जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में श्रमिकों ने बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किए। इन प्रदर्शनों में बेहतर वेतन, काम की स्थिति में सुधार और श्रम अधिकारों को मजबूत करने की मांग उठाई गई।

विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ते औद्योगिक उत्पादन और श्रम मांग के बावजूद अगर न्यूनतम मजदूरी का पालन ठीक से नहीं होता है तो यह असंतुलन आगे चलकर सामाजिक और आर्थिक तनाव को बढ़ा सकता है। रिपोर्ट यह भी संकेत देती है कि श्रम बाजार में पारदर्शिता और निगरानी प्रणाली को मजबूत करने की आवश्यकता है, ताकि श्रमिकों को उनका उचित हक मिल सके। कुल मिलाकर SBI रिसर्च की यह रिपोर्ट देश में श्रम व्यवस्था की वास्तविक स्थिति को उजागर करती है और नीति निर्माताओं के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत देती है कि वेज सिस्टम को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाने की जरूरत है।


You might also like!