टिकाऊ सजावटी मछली पालन को एक बड़ा बढ़ावा देते हुए, ICAR–केंद्रीय अंतर्देशीय मत्स्य अनुसंधान संस्थान (CIFRI) के वैज्ञानिकों ने *Channa stewartii* (चन्ना स्टुअर्टी) की भारत में पहली सफल कैप्टिव ब्रीडिंग और लार्वा पालन हासिल किया है। यह एक कीमती सजावटी मछली है जो मूल रूप से पूर्वोत्तर भारत की पहाड़ी धाराओं में पाई जाती है। CIFRI के गुवाहाटी क्षेत्रीय केंद्र में हासिल की गई यह सफलता, इस प्रजाति की जंगली आबादी पर दबाव कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिसे अब तक बड़े पैमाने पर प्राकृतिक आवासों से ही प्राप्त किया जाता रहा है।
सजावटी मछली व्यापार में लोकप्रिय और ₹600 से ₹1,200 प्रति जोड़ी के बीच कीमत वाली, इस 'असमिया स्नेकहेड' मछली की मांग लगातार बढ़ रही है। इससे नाजुक धारा-पारिस्थितिकी तंत्रों में अत्यधिक दोहन और पर्यावरणीय तनाव को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। यह शोध अप्रैल 2024 में 'सजावटी मछली प्रजनन और पालन पर अखिल भारतीय नेटवर्क परियोजना' के तहत शुरू हुआ। इसमें वैज्ञानिकों ने नियंत्रित परिस्थितियों में जंगल से पकड़े गए लगभग 30 'ब्रीडर' (प्रजनन योग्य मछलियों) को नए वातावरण के अनुकूल बनाया।
इन मछलियों को विशेष रूप से डिज़ाइन किए गए टैंकों में रखा गया था जो उनके प्राकृतिक आवास की नकल करते थे। तनाव कम करने और प्रजनन व्यवहार को बढ़ावा देने के लिए इनमें रेत की सतह, बांस की संरचनाओं और मिट्टी के आश्रयों का उपयोग किया गया। पानी की गुणवत्ता के सावधानीपूर्वक प्रबंधन और जीवित भोजन (live feed) पर आधारित आहार के माध्यम से, शोधकर्ता मछलियों में प्रजनन की तत्परता जगाने और एक ऐसे परिपक्व प्रजनन जोड़े की पहचान करने में सफल रहे, जिसमें स्पष्ट रूप से नर और मादा के शारीरिक अंतर (sexual dimorphism) दिखाई दे रहे थे।
इसके बाद इस जोड़े को एक अर्ध-प्राकृतिक प्रणाली में स्थानांतरित कर दिया गया, जहाँ बिना किसी हार्मोन के उपयोग के सफल प्राकृतिक प्रजनन (spawning) हासिल किया गया। इस प्रजाति में 1,578 से 2,769 अंडों की प्रजनन क्षमता दर्ज की गई, जिसमें अंडों से बच्चे निकलने (hatching) की सफलता दर 73 प्रतिशत रही। लगभग 8.4 मिमी आकार के इन लार्वा ने स्वस्थ विकास और सक्रिय तैराकी व्यवहार प्रदर्शित किया, जो कैद में इस प्रजाति के जीवन चक्र को पूरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। राष्ट्रीय नीति विश्लेषण।
Assam: सजावटी मत्स्य पालन में असम की बड़ी सफलता, पहली बार कैद में 'स्नेकहेड' मछली का प्रजनन
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