आयात घटाना और प्रदूषण कम करना सरकार की प्राथमिकता: गडकरी


देश 21 April 2026
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आयात घटाना और प्रदूषण कम करना सरकार की प्राथमिकता: गडकरी

नई दिल्ली, 21 अप्रैल । केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने मंगलवाक तो कहा कि देश का परिवहन पारिस्थितिकी तंत्र आधुनिक, सुरक्षित और टिकाऊ बनाने की दिशा में सरकार तेजी से काम कर रही है। सरकार का उद्देश्य आयात कम करना, सस्ता और प्रदूषण मुक्त परिवहन उपलब्ध कराना तथा इसे स्वदेशी बनाना है।

गडकरी ने यहां इंडिया हैबिटाट सेंटर में इंडियन फेडरेशन ऑफ ग्रीन एनर्जी (आईएफजीई) के ‘ग्रीन ट्रांसपोर्ट कॉन्क्लेव: सस्टेनेबल और ग्रीन मोबिलिटी के भविष्य की ओर तेजी’ कार्यक्रम में कहा कि आज देश में कुल ईंधन की जरूरत का 87 फीसदी आयात किया जाता है, जिसकी कीमत लगभग 22 लाख करोड़ रुपये है। पश्चिम एशिया संकट के चलते इस आयात पर निर्भरता के परिणाम देश को भुगतने पड़ रहे हैं। आत्मनिर्भर बनना ही सबसे बड़ा उद्देश्य है। नई तकनीक आने से पुराने उद्योगों में असुरक्षा की भावना पैदा होती है, इसके बावजूद आयात कम करना बेहद कठिन है।

उन्होंने कहा कि इस आयात को रोकने के लिए दो चीजें हैं जिनका समाधान सरकार के पास नहीं है। जनसंख्या और ऑटोमोबाइल की तेजी से बढ़ती संख्या। कई घरों में चार लोग रहते हैं लेकिन गाड़ियों की संख्या सात या आठ होती है। स्क्रैपिंग नीति से अच्छे परिणाम मिल रहे हैं क्योंकि देश में कचरे की मात्रा बहुत बढ़ गई है। एल्यूमीनियम, तांबा, प्लास्टिक, रबर और स्टील का आयात होता है। यदि इनका पुनर्चक्रण किया जाए तो ऑटोमोबाइल की लागत 30 फीसदी तक कम हो जाती है।

गडकरी ने कहा कि जब लागत कम होगी तो दोपहिया वाहनों का निर्यात और बढ़ेगा। वर्तमान में देश की सभी स्वदेशी दोपहिया वाहन कंपनियां कुल निर्माण का 50 फीसदी निर्यात करती हैं। यह सेक्टर रोजगार देने वाला बड़ा क्षेत्र है और 4.5 करोड़ युवाओं को रोजगार देता है। साथ ही यह उद्योग जीएसटी के रूप में सबसे अधिक कर राजस्व देता है और सबसे ज्यादा निर्यात करने वाला उद्योग भी है। उन्होंने कहा कि भारत को आर्थिक महाशक्ति बनाने में इस सेक्टर का बड़ा योगदान है।

उन्होंने कहा कि आज प्रदूषण हमारी सबसे बड़ी समस्या है। अर्थव्यवस्था, पारिस्थितिकी तंत्र और नैतिकता अगर बिगड़ जाए तो स्थिति बहुत खराब हो जाती है। ज्ञान से समृद्धि और कचरे से समृद्धि, दोनों का उपयोग करके हमें आगे जाना होगा। इससे एक से दूसरा और दूसरे से तीसरा रास्ता बन जाएगा। टिकाऊ विकास की दिशा में देश आगे बढ़ेगा।

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