प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि पश्चिम एशिया में चल रही उथल-पुथल के बावजूद भारत वैश्विक स्तर पर एक प्रतिष्ठित और भरोसेमंद राष्ट्र बना हुआ है। नई दिल्ली में आयोजित एनएक्सटी सम्मेलन को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि क्षेत्र में चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद देश स्थिर और दृढ़ बना हुआ है। उन्होंने कहा कि सरकार पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण आपूर्ति श्रृंखलाओं में उत्पन्न बाधाओं से निपटने के लिए स्थिति पर बारीकी से नजर रख रही है।
उन्होंने ऊर्जा क्षेत्र से संबंधित चुनौतियों के समाधान के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया और कहा कि तेल उत्पादन को प्रोत्साहित करने, ऊर्जा तक पहुंच बढ़ाने और इस क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को मजबूत करने के प्रयास किए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री ने आश्वासन दिया कि सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है कि संघर्ष की स्थितियों का बोझ नागरिकों पर न पड़े। उन्होंने कहा कि वैश्विक संघर्षों का किसानों और आम जनता पर न्यूनतम प्रभाव सुनिश्चित करने के लिए सभी कदम उठाए जाएंगे।
श्री मोदी ने कहा कि सरकार के निरंतर प्रयासों से स्थिति को प्रभावी ढंग से संभाला जाएगा और हर निर्णय जनता के हित में लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि पेट्रोलियम और डीजल क्षेत्र में क्षमता निर्माण में देश ने महत्वपूर्ण प्रगति की है। फिनलैंड के राष्ट्रपति और कनाडा के प्रधानमंत्री की हालिया यात्राओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वैश्विक नेता भारत के साथ सहयोग मजबूत करने के इच्छुक हैं और देश की तीव्र विकास दर को स्वीकार करते हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत वैश्विक ढाँचे को आकार दे रहा है और एक नई अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के निर्माण में सक्रिय योगदान दे रहा है। उन्होंने कहा कि देश अगली पीढ़ी के डिजिटल बुनियादी ढांचे की ओर अग्रसर है। एकीकृत भुगतान इंटरफेस (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) के कार्यान्वयन पर प्रकाश डालते हुए, श्री मोदी ने कहा कि भारत वास्तविक समय के डिजिटल भुगतान में सबसे तेजी से प्रगति करने वाला देश बनकर उभरा है। विकसित भारत की परिकल्पना का जिक्र करते हुए, श्री मोदी ने कहा कि देश विकास को गति देने के लिए अगली पीढ़ी के सुधारों को अपना रहा है।
उन्होंने आगे कहा कि कई वैश्विक संकटों के बावजूद, विश्व के नेता और विशेषज्ञ भारत को बड़ी उम्मीदों की नजरों से देखते हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि अगर कोई भविष्य का हिस्सा बनना चाहता है, तो उसे भारत में होना होगा। उन्होंने कहा कि देश न केवल प्रगति कर रहा है, बल्कि विकास के अगले चरण की ओर बढ़ रहा है। श्री मोदी ने बताया कि 2014 में देश में लगभग 14 करोड़ एलपीजी कनेक्शन थे, जो अब बढ़कर 33 करोड़ हो गए हैं। जनता के विश्वास और जागरूकता के महत्व पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि देश को चुनौतीपूर्ण समय से निकालने में प्रत्येक नागरिक की भूमिका है। उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में बोतलबंदी क्षमता दोगुनी हो गई है, जबकि वितरण केंद्रों की संख्या लगभग 13,000 से बढ़कर 25,000 हो गई है।
प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि भारत को ऊर्जा के लिए पूरी तरह से विदेशी स्रोतों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए और ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने बताया कि देश में एलएनजी टर्मिनलों की संख्या 2014 की तुलना में दोगुनी हो गई है। प्रधानमंत्री ने कहा कि 2014 से पहले देश में लगभग कोई रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार नहीं था, लेकिन आज देश ने पांच मिलियन टन से अधिक की रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार क्षमता स्थापित कर ली है और इसे और बढ़ाने के लिए काम जारी है।

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